International Women’s Day

Closer to myself | My poem on International Women's Day

Date: 08 March 2017

हिंदी | English

Author: Shamim Sharma

अपने मंगल सूत्र कंगन
टीके और तागड़ी के
सारे सोने को तोड़मरोड़ कर
अपनी रीढ़ को सजा लिया है
और वह फौलाद सी मज़बूत
दुनिया का सामना करने में
एक योद्धा की तरह तनी खड़ी है.

हिस्से आई मेहँदी और लिपस्टिक के रंगों से
रंगबिरंगे सपने रंग लिए हैं
जीवंत तस्वीरों का कोलाज बना लिया है
अब इंद्रधनुष मेरी हथेली पर सजा है.

अपने हिस्से की काजल और सुरमे की स्याही
लेखनी में सहेज कर
अपने भाग्य की
इबारत लिख ली है
किस्मत मेरी कलम के इशारे पर नाचती है अब.

अपनी चूड़ियों की खनक
और पायल की रुनझुन के सारे संगीत को
अपनी मुट्ठी में भर रखा है मैंने
जब चाहता है सुनती हूँ गुनगुनाती हूँ
अपनी धुन में नाचती-गाती हूँ
किसी से कोई भी शिकायत
नहीं है आज मुझे
मन से मन की ज़िन्दगी जी रही हूँ
जिसमें मेरी मर्ज़ी के रंग हैं
कवितायेँ हैं, संगीत है, स्वाद है
सपने पूरे होने के प्रमाणपत्र हैं
लोगों के तानों-उलाहनों से सात समुद्र की दूरी है
अब मैं अपने बहुत पास हूँ।

— शमीम शर्मा

हिंदी | English

All the gold that adorned my neck, arms and waist, now firms up my spine,
As if in the battlefield, I stand strong and erect like a warrior so fine.

I have woven colourful dreams with shades of henna, red lac and lip balm
These colourful living dreams sit like rainbow on my palm.

Now my luck follows the quill that wrote my new destiny
With the black of the kohl and of antimony.

I hold the sound of tinkling bangles and jingling anklets in my fist
Whenever I want,I play this music, and dance to it.

I have no complaints, I follow my heart,
All my favourite colours, dreams and verses thrive in my mind
Testimonials of fulfilled dreams with destiny to me now so kind.

I brook no grudge or a taunt,
I am closer to my body and soul,
That I am proud to flaunt.

— Shamim Sharma

Translated by: Raman Mohan,
Special Correspondant
The Tribune, Chandigarh (India)